कोंकण के मानगा बाँस के लिए ‘पाटलोबा पाटील’ का जन आंदोलन; मूल्यवर्धन (Value Addition) के लिए उत्पादक किसानों की एकजुट!

कोंकण के मानगा बाँस के लिए ‘पाटलोबा पाटील’ का जन आंदोलन; मूल्यवर्धन (Value Addition) के लिए उत्पादक किसानों की एकजुट!

🎋 कोंकण के मानगा बाँस के लिए ‘पाटलोबा पाटील’ का जन आंदोलन; मूल्यवर्धन (Value Addition) के लिए उत्पादक किसानों की एकजुट!

रत्नागिरी: (प्रतिनिधि) कोंकण क्षेत्र की भूमि पर उपेक्षित, लेकिन जबरदस्त क्षमता वाले ‘मानगा’ या ‘बोरबेट’ बाँस को अब वैश्विक बाज़ार में सम्मानजनक स्थान दिलाने का बीड़ा श्री पाटलोबा पाटील ने उठाया है। रत्नागिरी जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान देने के लिए उन्होंने बाँस उत्पादक किसानों को संगठित किया है और उत्पाद के ‘मूल्यवर्धन’ (Value Addition) के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन शुरू किया है।
उद्यमशीलता की ओर कदम: कच्चे माल को मिलेगा सोने का मोल! 💰
रत्नागिरी के कई किसान पारंपरिक रूप से मानगा बाँस की खेती करते हैं, लेकिन मार्केटिंग प्रणाली और उचित संगठन की कमी के कारण उन्हें अपनी कड़ी मेहनत का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पाता था। श्री पाटलोबा पाटील ने इस आवश्यकता को पहचाना और सौंदळ, कोळवण, खडी, तळवडे, पाचल जैसे विभिन्न स्थानों पर कार्यशालाएं आयोजित करके किसानों को मार्गदर्शन देना शुरू किया है।

श्री पाटील का मत: “मानगा बाँस कोंकण की भूमि का वरदान है। लेकिन केवल कच्चा बाँस बेचने के बजाय, अगर उस पर प्रक्रिया करके विभिन्न वस्तुएं बनाई जाएं, तो किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है। हमारा प्रयास इसी ‘मूल्यवर्धन’ पर केंद्रित है।”

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कच्चे बाँस को अंतिम उत्पादों में बदलना है। इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स (Processing Units) और लघु उद्योग (Small Scale Industries) स्थापित करने की योजना है, ताकि किसान केवल उत्पादक न रहकर उद्यमी (entrepreneur) बन सकें।
मूल्यवर्धन का सूत्र: बाँस आधारित उत्पाद और अवसर 🎍
इस महत्वपूर्ण आंदोलन में निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं पर ज़ोर दिया जा रहा है:

  • बाँस हस्तशिल्प: आकर्षक फर्नीचर, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाना।
  • निर्माण सामग्री: टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बाँस आधारित निर्माण सामग्री (Bamboo Based Construction Material) तैयार करना।
  • कोयला और ऊर्जा: बाँस का उपयोग बायो-चार (Bio-char) और बायो-एनर्जी (Bio-energy) उत्पादों के लिए करना।
  • प्रशिक्षण: बाँस प्रसंस्करण और मार्केटिंग का प्रशिक्षण देकर किसानों को उद्यमी बनाना।
    संगठन और आगामी गतिविधियाँ: रोज़गार सृजन की नई आशा 🧑‍🌾
    पाटलोबा पाटील के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नए रोज़गार के अवसर (Employment Opportunities) पैदा होंगे। प्रक्रिया उद्योगों में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता मिलने से, कोंकण से होने वाले पलायन (Migration) को रोकने में मदद मिलेगी, ऐसी उम्मीद है।
    विश्व बाँस दिवस के अवसर पर आयोजित मेले को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। यह मेला राजापुर तालुका बाँस किसान समूह और महाराष्ट्र बाँस प्रमोशन फाउंडेशन, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस मेले के लिए सुहास मोरे, प्रतिक लाड, नागेश बने (कोळवणखडी), वासुदेव घाग (सौंदळ), अब्दुलगणी लांजेकर (ओझर), अतुल पवार (केळवली), प्रल्हाद नारकर (आडवली), पितांबरी उद्योग समूह के दिलीप जाधव और कुंजन साळवी ने विशेष योगदान दिया।
  • नियमित गतिविधि: हर महीने की 18 तारीख को विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। हाल ही में, 18 अक्टूबर को पितांबरी उद्योग समूह की बाँस खेती और उद्योग का दौरा किया गया।
  • भविष्य का महत्वाकांक्षी कदम: इस योजना के अगले चरण में, 18 नवंबर 2025 को बाँस की बिक्री के लिए विभिन्न स्थानों पर बाँस डिपो शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना है।
    इस आंदोलन को और मज़बूत करने के लिए, श्री पाटील और उनके संगठन ने राज्य और केंद्र सरकार से ‘बाँस नीति’ (Bamboo Policy) के तहत वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाज़ार उपलब्ध कराने की मांग की है। पाटलोबा पाटील का यह आंदोलन रत्नागिरी के मानगा बाँस उत्पादक किसानों के लिए निश्चित रूप से एक नई सुबह लेकर आ सकता है।

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